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रविवार, 27 अक्तूबर 2013

कुमाउनीं के पहले पुस्तक के साथ P.D.F. फॉर्म में भी प्रकाशित कविता संग्रह ‘उघड़ी आंखोंक स्वींण’ का विमोचन

मेरी कुमाउनी कविताओं का संग्रह: उघड़ी आंखोंक स्वींड़ (लिंक क्लिक कर के PDF फॉर्मेट में पढ़ सकते हैं। )

आपकी अनेकों Querries के उत्तर में बताना है कि पुस्तक की सहयोग राशि रूपए 250 है। इसे P.D.F. फोर्मेट में रूपए 150 में (S.B.I. नैनीताल के खाता संख्या 30972689284 में जमाकर) ई-मेल से भी मंगाया जा सकता है।

सुविधा के लिए पुस्तक नैनीताल के मल्लीताल स्थित कंसल बुक डिपो एवं माल रोड स्थित नारायंस में उपलब्ध करा दी गयी है।

मेरी  चुनिन्दा कुमाउनी कवितायें मेरे ब्लॉग 'ऊंचे पहाड़ों से.… जीवन के स्वर' में भी देख सकते हैं।

बधाइयों, शुभकामनाओं एवं आशीर्वाद के लिए सभी मित्रों / अग्रजों का धन्यवाद, आभार,
संपर्क करें:
saharanavinjoshi@gmail.com
Mobile: 9412037779, 9675155117.

1 टिप्पणी:

  1. mein kumaoni bolan mein utu bhal nai chu, pr koshish karam rayun. meil mein jo link di rakh chu tumal khulan nai ryo. mein is pustak padan liji utsahit chu, kripya kar bher i link ko theek kari diyo. tumar aabhaari.
    Translation: - Sir, I am not that great in speaking Kumaoni but I am trying my best as I love this language. Moreover I wanted to tell you that the link is not working, its expired due to your porting off from wordpress (pure guess though!). I am looking forward to read this book. Can you update the link or send me the book instead?

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